भीमताल । उत्तराखण्ड के राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह ने गुरुवार को सोबन सिंह जीना विश्वविद्यालय के प्रथम दीक्षांत समारोह में प्रतिभाग करते हुए उपाधि प्राप्त करने वाले छात्र-छात्राओं को शुभकामनाएं दीं। उन्होंने कहा कि यह विश्वविद्यालय के इतिहास का स्वर्णिम क्षण है और आज उपाधि प्राप्त कर रहे विद्यार्थी संस्थान के ‘फाउंडेशन पिलर्स’ हैं, जिनके कार्य और उपलब्धियां आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा बनेंगी।
राज्यपाल ने कहा कि अल्मोड़ा की भूमि सांस्कृतिक, आध्यात्मिक और वैचारिक चेतना का केंद्र रही है। उन्होंने कसार देवी मंदिर, नीब करौरी बाबा तथा मां नंदा-सुनंदा की आध्यात्मिक विरासत का उल्लेख करते हुए कहा कि यह क्षेत्र सदैव राष्ट्र को नई दिशा देता रहा है। उन्होंने विश्वविद्यालय के नामधारी जननायक सोबन सिंह जीना को नमन करते हुए शिक्षा, शोध और नवाचार के क्षेत्र में विश्वविद्यालय की उपलब्धियों की सराहना की।
राज्यपाल ने कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के अनुरूप विश्वविद्यालय द्वारा कौशल विकास, नवाचार, उद्यमिता और पारंपरिक ज्ञान को बढ़ावा देने के लिए किए जा रहे प्रयास सराहनीय हैं। उन्होंने आध्यात्मिक पर्यटन केंद्र, हैप्पीनेस लैब, हरेला पीठ और लक्ष्मी देवी टम्टा केंद्र जैसी पहलों को विद्यार्थियों के समग्र विकास के लिए महत्वपूर्ण बताया।
अपने संबोधन में उन्होंने शोध कार्यों को समाज की वास्तविक समस्याओं के समाधान से जोड़ने पर जोर दिया। उन्होंने पर्वतीय क्षेत्रों की कृषि, जड़ी-बूटी, जल संरक्षण और स्थानीय चुनौतियों के समाधान के लिए उपयोगी शोध को बढ़ावा देने का आह्वान किया। साथ ही साइबर सुरक्षा और कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) जैसे आधुनिक विषयों पर विश्वविद्यालय की पहल को समय की आवश्यकता बताया।
राज्यपाल ने कहा कि प्रदेश की बेटियां आज हर क्षेत्र में उत्कृष्ट प्रदर्शन कर रही हैं और दीक्षांत समारोह में पदक प्राप्त करने वालों में बड़ी संख्या बेटियों की होना गर्व का विषय है। उन्होंने विकसित भारत के निर्माण में महिलाओं की भूमिका को अत्यंत महत्वपूर्ण बताया।
युवाओं को संबोधित करते हुए राज्यपाल ने कहा कि वे विकसित भारत-2047 के केवल साक्षी नहीं, बल्कि उसके सारथी भी हैं। उन्होंने युवाओं से बड़े सपने देखने, नवाचार को अपनाने और ‘नेशन फर्स्ट’ की भावना के साथ राष्ट्रहित को सर्वोपरि रखने का आह्वान किया।
उन्होंने कहा कि उत्तराखण्ड के युवाओं को रोजगार मांगने वाला नहीं, बल्कि रोजगार देने वाला उद्यमी बनना होगा। जैविक कृषि, जड़ी-बूटी, पर्यटन और स्टार्टअप के क्षेत्र में अपार संभावनाएं हैं, जिनके माध्यम से पलायन जैसी समस्या का समाधान किया जा सकता है।
कार्यक्रम में विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. सतपाल सिंह बिष्ट, शिक्षकगण, विशिष्ट अतिथि, अभिभावक और बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे।

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