कृषि क्षेत्र में ऋण वितरण बढ़ाने के डीएम के निर्देश, लक्ष्य पूरा न करने वाले बैंकों की बनेगी सूची

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भीमताल , 12 मार्च । जिलाधिकारी ललित मोहन रयाल ने गुरुवार को जिला स्तरीय आरसेटी सलाहकार समिति की बैठक की अध्यक्षता करते हुए सभी बैंकर्स को कृषि क्षेत्र में ऋण वितरण बढ़ाने और तय लक्ष्य की पूर्ति सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।
बैठक में जिलाधिकारी ने किसान क्रेडिट कार्ड (केसीसी), पॉलीहाउस, लघु उद्यमी, स्वयं सहायता समूह, पशुपालन और मत्स्य पालन विभाग से संबंधित योजनाओं की समीक्षा की। उन्होंने कहा कि किसानों के ऋण प्रकरणों का समयबद्ध निस्तारण किया जाए और बैंकर्स किसानों को ऋण देने में सकारात्मक रवैया अपनाएं।
जिलाधिकारी ने स्पष्ट किया कि जो बैंक लक्ष्य के अनुरूप ऋण उपलब्ध नहीं कराएंगे, ऐसे बैंकर्स की सूची तैयार की जाएगी। उन्होंने कहा कि सरकार की जनकल्याणकारी योजनाओं के तहत अधिक से अधिक लोगों को आरसेटी के माध्यम से प्रशिक्षण दिया जाए, ताकि लोग स्वरोजगार अपनाकर अपनी आर्थिक स्थिति मजबूत कर सकें।
बैठक के दौरान यह भी सामने आया कि कई बैंक पशुपालकों को ऋण उपलब्ध नहीं करा रहे हैं और उनके आवेदन निरस्त कर दिए जाते हैं। इस पर जिलाधिकारी ने नाराजगी जताते हुए लीड बैंक अधिकारी को ऐसे बैंकर्स की सूची तैयार करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि कोऑपरेटिव, पशुपालन विभाग और बैंक आपसी समन्वय बनाकर पशुपालकों की ऋण संबंधी समस्याओं का शीघ्र समाधान करें और प्रगति रिपोर्ट मुख्य विकास अधिकारी को उपलब्ध कराएं।
जिलाधिकारी ने कहा कि जनपद के लिए एक व्यापक और विकासोन्मुख ऋण योजना तैयार करने के लिए राष्ट्रीय कृषि और ग्रामीण विकास बैंक के प्रयास सराहनीय हैं। उन्होंने कहा कि पर्वतीय क्षेत्रों सहित प्राथमिकता वाले क्षेत्रों में पर्याप्त और समयबद्ध ऋण प्रवाह सुनिश्चित करने के लिए बैंकों, सरकारी विभागों और विकास संस्थाओं के बीच समन्वय बेहद जरूरी है। इससे कृषि, संबद्ध गतिविधियों, सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम, आवास और सामाजिक अवसंरचना क्षेत्रों में ऋण प्रवाह बढ़ेगा, जिससे आजीविका संवर्धन, उद्यमिता विकास और समावेशी आर्थिक विकास को बढ़ावा मिलेगा।
बैठक में जिला विकास प्रबंधक मुकेश बेलवाल ने बताया कि नाबार्ड की 7,928 करोड़ रुपये की संभाव्यता आधारित ऋण योजना से नैनीताल जिले के विकास को नई गति मिलेगी। इस योजना में फसल उत्पादन, बागवानी विकास, सिंचाई, कृषि यंत्रीकरण, दुग्ध उत्पादन, पोल्ट्री, मत्स्य पालन समेत अन्य संबद्ध गतिविधियां शामिल हैं। इसका उद्देश्य कृषि उत्पादकता बढ़ाना और कृषि विविधीकरण को प्रोत्साहित करना है।
बैठक में बागवानी को बढ़ावा देने, दुग्ध एवं पशुपालन गतिविधियों को सुदृढ़ करने, कृषि उत्पादों की मूल्य श्रृंखला विकसित करने, किसान उत्पादक संगठनों को प्रोत्साहित करने, खाद्य प्रसंस्करण और ग्रामीण उद्यमों के विस्तार, भंडारण और विपणन अवसंरचना को मजबूत करने तथा स्वयं सहायता समूहों और महिला उद्यमियों को सशक्त बनाने जैसी विकास रणनीतियों पर भी चर्चा की गई।
जिलाधिकारी ने बैंकर्स और विभागीय अधिकारियों को योजना में दर्शाई गई संभावनाओं के अनुरूप ऋण वितरण सुनिश्चित करने के निर्देश दिए, ताकि ग्रामीण अर्थव्यवस्था के उत्पादक क्षेत्रों में संस्थागत ऋण का पर्याप्त प्रवाह सुनिश्चित किया जा सके।
बैठक में जनपद के विभिन्न बैंकों के अधिकारी और संबंधित विभागों के अधिकारी उपस्थित रहे।




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