निजी स्कूलों की मनमानी पर सख्त डीएम, फीस-किताब-यूनिफॉर्म को लेकर जारी किए कड़े निर्देश

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भीमताल । जनपद नैनीताल में निजी विद्यालयों द्वारा फीस निर्धारण, पाठ्य पुस्तकों और यूनिफॉर्म को लेकर अपनाए जा रहे विशुद्ध व्यवसायिक व्यवहार की शिकायतों को गंभीरता से लेते हुए जिलाधिकारी ललित मोहन रयाल ने सख्त निर्देश जारी किए हैं। डीएम ने स्पष्ट किया कि शिक्षा का अधिकार अधिनियम-2009 के अंतर्गत शिक्षा एक परोपकारी गतिविधि है, इसे लाभ कमाने का साधन नहीं बनाया जा सकता।
जिलाधिकारी ने कहा कि माननीय न्यायालयों के स्पष्ट निर्देश हैं कि कोई भी विद्यालय अभिभावकों को किसी एक दुकान, विक्रेता या प्रकाशन से पुस्तक अथवा यूनिफॉर्म खरीदने के लिए बाध्य नहीं कर सकता। ऐसी बाध्यता अनुचित व्यापार व्यवहार की श्रेणी में आती है और यह पूर्णतः प्रतिबंधित है।
डीएम ने जारी आदेशों में कहा कि उत्तराखंड शासन में प्रचलित शासनादेशों के प्रावधानों का कड़ाई से पालन किया जाए। इनमें एनसीईआरटी/एससीईआरटी पुस्तकों को प्राथमिकता देना, फीस वृद्धि को पारदर्शी, औचित्यपूर्ण एवं अभिभावकों से संवाद के बाद ही लागू करना शामिल है। साथ ही प्रवेश के समय छात्र-छात्राओं की आयु का विशेष ध्यान रखा जाए। शैक्षिक सत्र की प्रारंभ तिथि 01 अप्रैल तक छह वर्ष की आयु पूर्ण कर चुके बच्चों को ही कक्षा-1 में प्रवेश दिया जाएगा।
जिलाधिकारी ने मुख्य शिक्षाधिकारी को निर्देश दिए कि जनपद के किसी भी निजी विद्यालय द्वारा बिना ठोस कारण और अभिभावक अथवा विद्यालय प्रबंधन समिति (एसएमसी) से परामर्श किए बिना फीस में वृद्धि न की जाए। फीस वृद्धि का लिखित औचित्य पूर्व वर्षों के रिकॉर्ड के साथ सुरक्षित रखना अनिवार्य होगा।
उन्होंने स्पष्ट किया कि यूनिफॉर्म के लिए किसी विशेष दुकान या विक्रेता से खरीदारी के लिए बाध्य करना प्रतिबंधित रहेगा। यूनिफॉर्म का स्वरूप ऐसा होना चाहिए, जो सामान्य बाजार में आसानी से उपलब्ध हो तथा अनावश्यक रूप से बार-बार यूनिफॉर्म में बदलाव न किया जाए।
डीएम ने कहा कि पाठ्य पुस्तकों के चयन में एनसीईआरटी/एससीईआरटी अथवा शासन द्वारा अनुमन्य पाठ्यक्रम की पुस्तकों को प्राथमिकता दी जाए। किसी विशेष प्रकाशन या दुकान से पुस्तक खरीदने के लिए प्रत्यक्ष अथवा अप्रत्यक्ष दबाव पूर्णतः प्रतिबंधित रहेगा। कापियों पर विद्यालय का लोगो अंकित नहीं किया जाएगा।
पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए प्रत्येक विद्यालय को अपना फीस स्ट्रक्चर, यूनिफॉर्म विवरण एवं पुस्तक सूची विद्यालय परिसर के नोटिस बोर्ड तथा वेबसाइट (यदि उपलब्ध हो) पर प्रदर्शित करना अनिवार्य होगा। निर्धारित शुल्क के अतिरिक्त कोई अन्य शुल्क नहीं लिया जाएगा।
जिलाधिकारी ने मुख्य शिक्षाधिकारी को निर्देश दिए कि जनपद के समस्त निजी विद्यालयों का निरीक्षण मुख्य शिक्षाधिकारी अथवा जिला शिक्षाधिकारी द्वारा नामित जांच समिति से कराया जाए। निरीक्षण रिपोर्ट अभिलेखीय साक्ष्यों सहित जिलाधिकारी कार्यालय में प्रस्तुत की जाएगी।




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