उत्तरायणी/मकर संक्रांति पर संगम स्नान, जागर और खिचड़ी भोज में जुटे हजारों श्रद्धालु
भीमताल । कुमाऊं–गढ़वाल की सांस्कृतिक एकता के प्रतीक रानीबाग में उत्तरायणी/मकर संक्रांति के पावन अवसर पर श्रद्धा और आस्था का सैलाब उमड़ पड़ा। रानीबाग स्थित जियारानी शीला, गुफा और चित्रशिला घाट पर तड़के से ही श्रद्धालुओं ने गार्गी नदी के संगम में स्नान कर पुण्य लाभ अर्जित किया और ऐतिहासिक मेले में सहभागिता की।
इस अवसर पर ब्लॉक प्रमुख डॉ. हरीश सिंह बिष्ट सहित स्थानीय जनप्रतिनिधियों व सामाजिक संगठनों की ओर से श्रद्धालुओं को माघ खिचड़ी प्रसाद वितरित किया गया। डॉ. बिष्ट ने कहा कि रानीबाग का यह मेला पौराणिक और ऐतिहासिक महत्व रखता है। आगामी वर्षों में इसे और भव्य व सुव्यवस्थित बनाने के लिए ठोस प्रयास किए जाएंगे, ताकि श्रद्धालुओं को बेहतर सुविधाएं मिल सकें। उन्होंने लोगों से बुराइयों को त्यागकर अच्छाई की ओर कदम बढ़ाने का संकल्प लेने की अपील की।
ब्लॉक प्रमुख ने बताया कि यह स्थल तराई और पहाड़ के संगम का प्रतीक है। राज्य सरकार और मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी से इस मेले को बागेश्वर की तर्ज पर भव्य रूप देने तथा आधारभूत सुविधाओं के विस्तार की मांग की जाएगी। मकर संक्रांति के अवसर पर बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने जनेऊ संस्कार भी संपन्न कराए।
रानीबाग का यह मेला कुमाऊंनी संस्कृति की प्रतीक वीरांगना रानी जिया, जिन्हें ‘कुमाऊं की लक्ष्मीबाई’ कहा जाता है, की स्मृति में आयोजित होता है। कुमाऊं और गढ़वाल के विभिन्न हिस्सों से पहुंचे कत्यूरी वंशजों ने चित्रशिला धाम में अपनी कुलदेवी जियारानी के दर्शन किए और उनकी स्मृति में रातभर पूजा-अर्चना कर जागर लगाया।
मसकबीन, ढोल, दमाऊं, नगाड़ा और थाली की गूंज के साथ जियारानी की वीरगाथा का गायन किया गया। जय जियारानी के उद्घोष के साथ रानीखेत, कोटाबाग, सल्ट, चौखुटिया, रामनगर सहित गढ़वाल मंडल से कत्यूरी वंशज दोपहर से ही दलों में रानीबाग पहुंचने लगे थे। संगम स्नान के बाद श्रद्धालुओं ने जियारानी का ध्यान कर पूजा संपन्न की।
शिक्षक दीपक नौगाई ने बताया कि चंद वंश से पूर्व कुमाऊं पर सूर्यवंशी कत्यूरियों का शासन रहा है। कत्यूर वंश का आगमन सातवीं सदी में अयोध्या से हुआ माना जाता है। कार्यक्रम में ग्राम प्रधान कलावती थापा, जया बोहरा, महेश भंडारी, चंदन नौगाई, रमा पांडे, आनंद कुजरवाल, भुवन लाल साह, मनीष गोनी, प्रकाश बृजवासी, महेंद्र कुमार, धीरेंद्र बिष्ट, गोविंद नेगी, महेंद्र कुंवर, आशा भंडारी, सुमन बिष्ट, तारा बिष्ट, भगवती बिष्ट, मनोज, अंजना साह, धीरेंद्र जीना, कमल कुल्याल सहित बड़ी संख्या में ग्रामीण और श्रद्धालु उपस्थित रहे।

+ There are no comments
Add yours