देहरादून। प्रसिद्व पर्यावरणविद् और हैस्कों के संस्थापक डा. अनिल जोशी ने अंकिता हत्याकांड प्रकरण में वीआईपी का नाम उजागर करने के लिए शुक्रवार को देहरादून के बसंत विहार थाने में धारा 238, 249, 45 BNS के तहत मुकदमा दर्ज कराया है। अब डा. जोशी की एफआईआर के सापेक्ष ही अंकिता भंडारी हत्याकांड की सीबीआई जांच होगी। शासन वसंत विहार थाने में दर्ज मुकदमे से संबंधित दस्तावेजों को सीबीआई को भेजेगा।
आईजी गढ़वाल राजीव स्वरुप ने शनिवार को पत्रकारों से बातचीत में बताया कि मुख्यमन्त्री द्वारा प्रकरण की संवेदनशीलता को दृष्टिगत रखते हुये स्वयं स्व. अंकिता भण्डारी के माता-पिता से वार्ता कर प्रकरण की सीबीआई से कराने की सिफारिश कर चुके हैं।
उन्होंने बताया कि प्रकरण से सम्बन्धित समस्त अभिलेख गढ़वाल रेंज कार्यालय द्वारा पुलिस मुख्यालय को भेजे जा चुके हैं। इन अभिलेखों को शासन स्तर से केद्रीय जांच एजेन्सी सीबाईआई को भेजा जायेगा।
आईजी राजीव स्वरुप ने बताया कि स्व. अंकिता भण्डारी हत्याकाण्ड प्रकरण में शुरू से ही पुलिस द्वारा तत्काल वरिष्ठ महिला पुलिस अधिकारी (आईपीएस) के नेतृत्व में एसआईटी का गठन किया गया। एसआईटी द्वारा उक्त प्रकरण में अभियुक्तों के विरूद्ध साक्ष्य संकलन कर तीनों अभियुक्तों को गिरफ्तार कर जेल भेजा गया। प्रभावी पैरवी की गयी, जिससे अभियुक्तों को एक दिन के लिये भी जमानत नहीं मिली। पुलिस द्वारा प्रस्तुत साक्ष्यों के आधार पर न्यायालय द्वारा तीनों अभियुक्तों को कठोरतम दण्ड, आजीवन कारावास की सजा सुनायी गयी।
आईजी राजीव स्वरुप ने आम जनमानस से अपील की कि भ्रामक सूचनाओं या अफवाहों पर ध्यान न दें। यदि उक्त प्रकरण से सम्बन्धित कोई साक्ष्य प्रस्तुत करना चाहता है तो वह पुलिस अथवा जांच एजेन्सी के समक्ष प्रस्तुत कर सकता है।

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