2055 तक की जरूरतों के हिसाब से तैयार हो रही पेयजल योजनाएं, समय पर पूरा करें काम: आयुक्त

भीमताल, 4 अगस्त। कुमाऊँ आयुक्त एवं सचिव मुख्यमंत्री दीपक रावत ने मंगलवार को यूयूएसडीए की चंपावत और हल्द्वानी में संचालित पेयजल व शहरी आधारभूत ढांचा परियोजनाओं की समीक्षा करते हुए अधिकारियों को सभी कार्य निर्धारित समयसीमा में गुणवत्ता के साथ पूरा करने के निर्देश दिए। उन्होंने स्पष्ट कहा कि पाइपलाइन, जलाशयों और जल शोधन संयंत्रों के निर्माण में किसी प्रकार का समझौता नहीं होना चाहिए तथा जहां सड़कें खोदी गई हैं, वहां शीघ्र पुनर्स्थापन कराया जाए।

समीक्षा में बताया गया कि चंपावत जलापूर्ति योजना वर्ष 2055 तक की अनुमानित 6.8 एमएलडी जल मांग को ध्यान में रखकर तैयार की जा रही है। करीब 240.26 करोड़ रुपये की इस परियोजना को 10 सितंबर 2027 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। योजना के तहत 109 किमी पाइपलाइन, 1,600 घरेलू जल कनेक्शन और 3.5 एमएलडी क्षमता का जल शोधन संयंत्र बनाया जा रहा है। अब तक करीब 60 प्रतिशत कार्य पूरा हो चुका है।

वहीं किच्छा जलापूर्ति योजना में वर्ष 2055 तक 31.33 एमएलडी जल मांग को पूरा करने के लिए 478.66 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे। इसके तहत 323 किमी पाइपलाइन, 9,500 घरेलू कनेक्शन और 12 ट्यूबवेल का निर्माण किया जा रहा है। चार पंप हाउस तैयार हो चुके हैं, जबकि एक का निर्माण जारी है। बैठक में टनकपुर जलापूर्ति योजना की प्रगति की भी समीक्षा की गई।

हल्द्वानी में आईयूआईडीएच (IUIDH-HDW) परियोजना की समीक्षा के दौरान अधिकारियों ने बताया कि 39,716 घरेलू जल संयोजन, 14 ओवरहेड वॉटर टैंक, 13 नए ट्यूबवेल, 122 किमी सीवर नेटवर्क और 14.5 एमएलडी क्षमता के एसटीपी का निर्माण किया जा रहा है। अब तक 21,483 घरेलू जल कनेक्शन, 436 किमी जल वितरण पाइपलाइन, 76 किमी सीवर लाइन तथा 256 किमी स्थायी सड़क पुनर्स्थापन का कार्य पूरा हो चुका है। अगस्त माह में आरटीओ रोड, काठगोदाम क्षेत्र में नई पाइपलाइन से जलापूर्ति शुरू करने की तैयारी है।

बैठक में नैनीताल रोड, कालाढूंगी रोड और स्टेशन रोड के चौड़ीकरण, फुटपाथ, यूटिलिटी डक्ट, पार्किंग, स्ट्रीट लाइट और ड्रेनेज कार्यों की भी समीक्षा की गई। आयुक्त ने अधिकारियों को परियोजनाओं की नियमित मॉनिटरिंग, बाधाओं का समयबद्ध समाधान और जनहित को सर्वोच्च प्राथमिकता देने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि इन योजनाओं के पूरा होने से संबंधित क्षेत्रों में आधुनिक एवं निर्बाध पेयजल आपूर्ति सुनिश्चित होगी।

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