संसद में उठाया साइबर अपराध का मुद्दा, अजय भट्ट के सवाल पर केंद्र ने गिनाए सख्त कदम

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भीमताल : नैनीताल-ऊधमसिंह नगर संसदीय क्षेत्र से सांसद अजय भट्ट ने संसद में देश में बढ़ते साइबर अपराधों का मुद्दा उठाया। उन्होंने अतारांकित प्रश्न के माध्यम से केंद्रीय गृह मंत्रालय से पिछले तीन वर्षों में साइबर अपराध के मामलों का ब्यौरा, राज्यों में हुई वृद्धि और ऑनलाइन लेनदेन को सुरक्षित बनाने के लिए किए जा रहे उपायों की जानकारी मांगी।
सांसद के प्रश्न के उत्तर में केंद्रीय गृह राज्य मंत्री संजय कुमार ने बताया कि देश में साइबर अपराध से निपटने के लिए सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम 2000, भारतीय न्याय संहिता 2023 और पोक्सो अधिनियम 2012 के तहत पर्याप्त कानूनी प्रावधान मौजूद हैं। केंद्र सरकार ने साइबर अपराध से प्रभावी ढंग से निपटने के लिए कई संस्थागत और तकनीकी कदम उठाए हैं।
गृह मंत्रालय ने देशभर में साइबर अपराधों के समन्वित नियंत्रण के लिए भारतीय साइबर अपराध समन्वय केंद्र (आई4सी) की स्थापना की है। इसके साथ ही आम जनता को शिकायत दर्ज कराने की सुविधा देने के लिए राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल (cybercrime.gov.in) भी शुरू किया गया है। इस पोर्टल पर दर्ज शिकायतों पर संबंधित राज्य और केंद्रशासित प्रदेशों की कानून प्रवर्तन एजेंसियां कार्रवाई करती हैं।
वित्तीय साइबर धोखाधड़ी की घटनाओं पर तत्काल कार्रवाई के लिए वर्ष 2021 में नागरिक वित्तीय साइबर धोखाधड़ी रिपोर्टिंग एवं प्रबंधन प्रणाली शुरू की गई। इस प्रणाली के तहत 31 जनवरी 2026 तक 24.65 लाख से अधिक शिकायतों में करीब 8690 करोड़ रुपये की राशि ठगी से बचाई जा चुकी है। इसके अलावा शिकायत दर्ज कराने में मदद के लिए टोल फ्री हेल्पलाइन नंबर 1930 भी संचालित किया जा रहा है।
साइबर अपराध के प्रति जागरूकता बढ़ाने के लिए भी केंद्र सरकार ने व्यापक अभियान चलाए हैं। नरेंद्र मोदी ने 27 अक्टूबर 2024 को ‘मन की बात’ कार्यक्रम में डिजिटल गिरफ्तारी जैसे साइबर अपराधों के प्रति नागरिकों को सतर्क रहने का संदेश दिया था।
इसके अलावा कॉलर ट्यून अभियान, टीवी और रेडियो कार्यक्रम, सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म, स्कूल अभियान, सिनेमा हॉल में विज्ञापन, रेलवे स्टेशनों और हवाई अड्डों पर डिजिटल डिस्प्ले के माध्यम से भी लोगों को साइबर सुरक्षा के प्रति जागरूक किया जा रहा है। साथ ही आईपीएल, कुंभ मेला और सूरजकुंड मेला जैसे बड़े आयोजनों के दौरान भी जागरूकता अभियान चलाए गए हैं।




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