आधुनिक ट्राउट मत्स्य पालन से बदली अभिषेक की तकदीर, नाबार्ड की मदद से बना स्वरोजगार का मॉडल

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भीमताल : मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में राज्य सरकार की स्वरोजगार एवं आधुनिक कृषि आधारित योजनाएं पर्वतीय क्षेत्रों में नए अवसर पैदा कर रही हैं। इसी कड़ी में नैनीताल जिले के रामगढ़ विकासखंड के बोहराकोट निवासी युवा अभिषेक खनवाल ने आधुनिक तकनीक से ट्राउट मत्स्य पालन कर आत्मनिर्भरता की नई मिसाल पेश की है।

भारतीय शीतजल मत्स्य अनुसंधान संस्थान (आईसीएआर-डीसीएफआर), भीमताल ने नाबार्ड के फार्म सेक्टर प्रमोशन फंड (एफएसपीएफ) के तहत 25 लाख रुपये की अनुदान सहायता से अभिषेक के यहां आधुनिक रीसर्कुलेटिंग एक्वाकल्चर सिस्टम (आरएएस) आधारित हाइब्रिड ट्राउट यूनिट स्थापित कराई है। परियोजना के तहत दो नर्सरी और दो ग्रो-आउट टैंक लगाए गए हैं, जिनकी प्रति चक्र उत्पादन क्षमता 800 से 1000 किलोग्राम रेनबो ट्राउट है।

विशेषज्ञों के अनुसार यह आधुनिक प्रणाली पारंपरिक ट्राउट पालन की तुलना में करीब 75 प्रतिशत तक पानी की बचत करती है। जहां पहले 600 लीटर प्रति मिनट जल प्रवाह की आवश्यकता होती थी, वहीं अब 100 से 150 लीटर प्रति मिनट पानी में भी सफल उत्पादन संभव हो रहा है। कम ऊर्जा खपत और कम लागत के कारण यह तकनीक पर्वतीय क्षेत्रों के छोटे किसानों के लिए भी लाभदायक साबित हो रही है।

परियोजना के तहत अभिषेक खनवाल को मत्स्य बीज, तकनीकी प्रशिक्षण और विशेषज्ञों का मार्गदर्शन भी उपलब्ध कराया गया। परियोजना का लागत-लाभ अनुपात 1.88 तथा निवेश की वापसी अवधि लगभग एक वर्ष आंकी गई है, जिससे इसकी आर्थिक उपयोगिता भी साबित होती है।

अभिषेक खनवाल ने कहा कि नाबार्ड, आईसीएआर-डीसीएफआर और राज्य सरकार के सहयोग के बिना इतनी आधुनिक तकनीक से मत्स्य पालन शुरू करना संभव नहीं था। उन्होंने उम्मीद जताई कि भविष्य में वह अपने उद्यम का विस्तार कर अन्य युवाओं को भी रोजगार उपलब्ध कराएंगे।

राज्य सरकार का कहना है कि कृषि, बागवानी, मत्स्य पालन और ग्रामीण उद्यमिता को बढ़ावा देने के लिए संचालित ऐसी योजनाएं पर्वतीय क्षेत्रों में रोजगार और आय बढ़ाने के साथ-साथ ‘आत्मनिर्भर उत्तराखंड’ के लक्ष्य को भी मजबूती दे रही हैं।




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