बाघ के आतंक से ग्रामीणों में दहशत, वन विभाग से शीघ्र कार्रवाई की मांग

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ग्रामीण आक्रोश बैठक में शामिल हुए पूर्व दर्जा प्राप्त राज्यमंत्री हरीश पनेरु

भीमताल । पूर्व दर्जा प्राप्त राज्यमंत्री एवं प्रमुख राज्य आंदोलनकारी हरीश पनेरु ने सोमवार को ग्राम थलाङी क्वैदल में आयोजित ग्रामीण आक्रोश बैठक में प्रतिभाग कर क्षेत्र में बाघ के बढ़ते आतंक से ग्रामीणों को निजात दिलाने की मांग वन विभाग से की। उन्होंने कहा कि बाघ की लगातार आवाजाही से क्षेत्र में भय का माहौल बना हुआ है, जिससे ग्रामीणों का जनजीवन प्रभावित हो रहा है।
बैठक में पनेरु ने ग्रामीणों से अपील की कि वे अकेले इधर-उधर न जाएं। उन्होंने बताया कि सबसे अधिक परेशानी बच्चों को हो रही है, जिन्हें क्वैदल से धानाचूली तक पैदल स्कूल जाना पड़ता है। बाघ के डर से कई बच्चे बीते एक सप्ताह से स्कूल नहीं जा पा रहे हैं। इस पर उन्होंने वन विभाग से बच्चों के स्कूल आने-जाने के लिए वाहन की व्यवस्था किए जाने की मांग की। ग्राम प्रधान किरण देवी की अध्यक्षता में बैठक के दौरान बाघ के आतंक से निपटने को लेकर रणनीति तैयार की गई तथा वन विभाग से पिंजरा लगाए जाने की मांग उठाई गई। पूर्व दर्जा प्राप्त राज्यमंत्री ने डीएफओ से स्पष्ट कहा कि यदि किसी भी प्रकार की जान-माल की हानि होती है तो इसकी जिम्मेदारी वन विभाग की होगी, क्योंकि विभाग ग्रामीणों की समस्याओं की अनदेखी कर रहा है।
बैठक के उपरांत हरीश पनेरु ने स्कूल से घर लौट रहे बच्चों से रास्ते में मुलाकात कर उनसे बातचीत की और सावधानी बरतते हुए विद्यालय आने-जाने की अपील की। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि वन विभाग ने शीघ्र ठोस कदम नहीं उठाए तो ग्रामीणों के साथ मिलकर आंदोलन किया जाएगा।
बैठक में आन सिंह, कृपाल सिंह, हरेंद्र सिंह, प्रकाश चंद्र, गोपाल सिंह, शेर सिंह, आनंदी देवी, रेखा देवी सहित बड़ी संख्या में ग्रामीण उपस्थित रहे।




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