देहरादून। आईटीबीपी, पशुपालन विभाग और स्वास्थ्य विभाग के बीच आज एक ऐतिहासिक एमओयू हुआ। इस समझौते ज्ञापन का उद्देश्य सीमावर्ती गांवों में ग्रामीणों को चिकित्सा सेवा और प्राथमिक पशु चिकित्सा सेवाओं की निरंतर और उच्च गुणवत्ता वाली उपलब्धता सुनिश्चित करना है। पहले चरण में तीन जिलों पिथौरागढ़, चमोली और उत्तरकाशी के 108 सीमावर्ती गांवों को शामिल किया गया है।
इन गांवों में पशुपालन विभाग के उपलब्ध संसाधनों के माध्यम से आईटीबीपी के पशु चिकित्सकों और पैरामेडिक्स द्वारा प्राथमिक पशु चिकित्सा सेवाएं, टेली-मेडिसिन, और पशु स्वास्थ्य की सुविधाएं प्रदान की जाएंगी। समझौते के अनुसार प्रत्येक पशु के लिए वेटरिनरी हेल्थ कार्ड तैयार किया जाएगा, जिससे टीकाकरण और दवाओं की गुणवत्ता सुनिश्चित हो सके। एक संयुक्त संचालन समिति का गठन किया गया है, जो निर्णय लेने और आवश्यक समीक्षा करने के लिए जिम्मेदार होगी।
यह समझौता प्रारंभिक रूप से दो वर्षों के लिए लागू होगा और समय-समय पर समीक्षा की जाएगी। इस समझौते के माध्यम से एक ऐसा व्यवस्थित और जवाबदेह ढांचा तैयार किया गया है, जिसमें मानव संसाधन, लॉगिस्टिक्स, वित्तीय आपूर्ति, टीकाकरण जैसे सभी पहलुओं को एकीकृत रूप से शामिल किया गया है ।
इसी प्रकार स्वास्थ्य विभाग एवं आईटीबीपी के मध्य हुए समझौता ज्ञापन के अनुसार उक्त क्षेत्र की जानता को आईटीबीपी के चिकित्सकों के माध्यम से स्वास्थ्य सुविधाएं प्राप्त होंगी।
समझौते ज्ञापन पर हस्ताक्षर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की अध्यक्षता में पशुपालन मंत्री सौरभ बहुगुणा, स्वास्थ्य मंत्री डा. धन सिंह रावत, आईजी आईटीबीपी संजय गुंजियाल, सचिव पशुपालन बीवीआरसी पुरुषोत्तम और निदेशक पशुपालन डॉ उदय शंकर एवं स्वास्थ्य निदेशक सुनीता टम्टा की उपस्थिति में हुआ।

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