उत्तराखंड में समान नागरिक संहिता (UCC) लागू होने के बाद अब विवाह और लिव-इन संबंधों का पंजीकरण अनिवार्य कर दिया गया है। यह पंजीकरण अब रजिस्ट्रेशन ऑफिस के बजाय नगर निकायों और ग्राम पंचायतों के स्तर पर किया जाएगा। नए कानून के तहत लिव-इन रिश्तों को कानूनी मान्यता दी गई है, लेकिन इसके लिए पंजीकरण ज़रूरी होगा। UCC के तहत जोड़ों को अपने विवाह का पंजीकरण कराना अनिवार्य है यदि उन्होंने 26 मई 2010 के बाद शादी की है। बिना पंजीकरण के संबंधों को मान्यता नहीं दी जाएगी। शहरी क्षेत्रों में विवाह और लिव-इन संबंधों का पंजीकरण नगर निकायों द्वारा किया जाएगा, जबकि ग्रामीण क्षेत्रों में यह कार्य ग्राम विकास अधिकारी के माध्यम से संपन्न होगा। लिव-इन संबंध में रहने वाले जोड़ों को 16 पन्नों वाला फॉर्म भरना होगा, जिसमें पंजीकरण शुल्क भी देना होगा। उन्हें यह घोषित करना होगा कि वे भविष्य में विवाह के लिए पात्र हैं। साथ ही, यदि पहले कोई लिव-इन संबंध रहा हो, तो उसकी जानकारी देना भी अनिवार्य होगा। समान नागरिक संहिता का उद्देश्य समाज में समानता, पारदर्शिता और जिम्मेदारी सुनिश्चित करना है, जिसके तहत सभी समुदायों के लिए एक समान कानून लागू किया गया है।
उत्तराखंड में लागू हुआ समान नागरिक संहिता, विवाह और लिव-इन संबंधों का पंजीकरण अनिवार्य
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