भीमताल । शहर के कैनाल रोड, मल्ला गोरखपुर और तिकोनिया क्षेत्र में संचालित जन सेवा केंद्र आज जरूरतमंदों के लिए सबसे बड़ा सहारा बनकर उभरा है। समाजसेवी हेमंत सिंह गौनिया के नेतृत्व में चल रहा यह केंद्र सेवा, संघर्ष और समर्पण की अनोखी मिसाल पेश कर रहा है।
जहां एक ओर समाज सेवा के नाम पर दिखावा आम हो गया है, वहीं हेमंत गौनिया ने जमीनी स्तर पर कार्य करते हुए अलग पहचान बनाई है। दिन-रात लोगों की मदद के साथ ही लावारिस और बीमार पशुओं की सेवा भी उनके कार्यों का प्रमुख हिस्सा है।
कोविड-19 महामारी के दौरान उन्होंने अपनी टीम के साथ लगातार तीन वर्षों तक पूरे नैनीताल जिले में थानों, चौकियों, सरकारी कार्यालयों और गांव-गली तक सैनिटाइजेशन अभियान चलाया। डेंगू और मलेरिया से बचाव के लिए फॉगिंग व छिड़काव भी किया। इस दौरान उन्होंने कई लावारिस शवों का अंतिम संस्कार कर मानवता की मिसाल पेश की।
वर्ष 2013 की उत्तराखंड आपदा के दौरान भी उनकी टीम ने सक्रिय भूमिका निभाई। हल्द्वानी के मुखानी स्थित एक बैंक्विट हॉल से करीब 65 लाख रुपये का राहत सामग्री 11 ट्रकों के माध्यम से धारचूला भेजी गई। इसके बाद भी हर आपदा में उनकी टीम लगातार लोगों की मदद करती रही है।
जन सेवा केंद्र के माध्यम से विधवा, वृद्धा और विकलांग पेंशन दिलाना, सरकारी योजनाओं का लाभ पहुंचाना, विभागों में अटकी फाइलें निकलवाना और विभिन्न कार्यालयों के कार्य निशुल्क कराना उनकी पहचान बन चुका है।
समाज सेवा के क्षेत्र में हेमंत गौनिया 75 बार रक्तदान कर चुके हैं। बीते दो वर्षों में 234 अंतिम संस्कार कराने के साथ ही अब तक अनगिनत लोगों की मदद कर चुके हैं। गरीब मरीजों का इलाज हल्द्वानी, बरेली, देहरादून और दिल्ली तक कराना भी उनके कार्यों में शामिल है।
शिक्षा के क्षेत्र में भी उनका योगदान सराहनीय है। स्कूलों में रंगाई-पुताई, खेल सामग्री उपलब्ध कराना, जरूरतमंद बच्चों की फीस व किताबों की व्यवस्था करना और त्योहारों पर बच्चों को उपहार व भोजन वितरित करना उनके सेवा कार्यों का हिस्सा है।
इसके अलावा स्वच्छता अभियान, पर्यावरण संरक्षण के लिए वृक्षारोपण और नदी-नालों की सफाई जैसे कार्य भी निरंतर किए जा रहे हैं। आरटीआई के माध्यम से उन्होंने विभिन्न विभागों की खामियों को उजागर कर सिस्टम को जवाबदेह बनाने का प्रयास किया है।
वर्तमान में कई जनहित से जुड़े मामले न्यायालय में विचाराधीन हैं, जिनकी पैरवी भी वे लगातार कर रहे हैं। उनके इस सेवा अभियान में उनके पुत्र वंश गौनिया भी सक्रिय सहयोग दे रहे हैं।
बिना किसी सरकारी सहायता या एनजीओ के सहयोग के संचालित यह जन सेवा केंद्र आज एक जनआंदोलन का रूप ले चुका है। विभिन्न राज्यों की सरकारों द्वारा सम्मानित हो चुके हेमंत गौनिया को प्रदेश के प्रमुख समाजसेवियों में गिना जाता है।
यह केंद्र केवल एक कार्यालय नहीं, बल्कि जरूरतमंदों के लिए उम्मीद की किरण बन चुका है, जहां से कोई भी व्यक्ति खाली हाथ नहीं लौटता।

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