नई दिल्ली। नई दिल्ली में आयोजित अखिल भारतीय शिक्षा समागम 2025 में राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी) 2020 की 5वीं वर्षगांठ पर भारत के शिक्षाविदों, नीति निर्माताओं और शिक्षण संस्थानों ने एक मंच पर मिलकर इसकी उपलब्धियों की समीक्षा की और भविष्य की दिशा पर विमर्श किया। इस महत्त्वपूर्ण आयोजन का उद्घाटन केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेन्द्र प्रधान द्वारा किया गया, जिन्होंने इस अवसर पर 4,000 करोड़ रुपये से अधिक की नई शैक्षिक परियोजनाओं का उद्घाटन एवं शिलान्यास भी किया।
इस समागम के उद्घाटन सत्र में अन्य राज्यों के शिक्षामत्रियों के साथ उत्तराखंड के शिक्षा मंत्री डॉ. धन सिंह रावत मंचासीन रहे, तथा हेमवती नंदन बहुगुणा गढ़वाल विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. श्रीप्रकाश सिंह इस समागम कार्यक्रम में उपस्थित रहे। तथा उतराखंड के मुख्यमत्री पुष्कर सिंह धामी ने ऑनलाइन इस कार्यक्रम में सहभागिता की जो एनईपी के सफल क्रियान्वयन के लिए प्रतिबद्धता दर्शाता हैं।
गौरतलब है कि जहां हेमवती नंदन बहुगुणा गढ़वाल विश्वविद्यालय एनईपी 2020 को पूर्ण रूप से अपनाने की दिशा में प्रतिबद्ध है वहीं उत्तराखंड में राज्य विश्वविद्यालयों में भी एनईपी 2020 को जमीनी स्तर पर लागू करने के लिए सतत प्रयास किए जा रहे हैं। विशेष रूप से गढ़वाल विश्वविद्यालय बहु-विषयी, कौशल-आधारित एवं लचीली शिक्षा प्रणाली के लिए आवश्यक ढाँचागत एवं शैक्षिक सुधारों की दिशा में निरंतर कार्य कर रहा है।
कार्यक्रम के दौरान देश के विभिन्न 11 उच्च शिक्षण संस्थानों के भवनों का उद्घाटन व शिलान्यास किया गया, जिनमें IIT बॉम्बे, NIT रायपुर, MNIT जयपुर जैसे संस्थान शामिल हैं। प्रधान ने अपने वक्तव्य में समागम को “विकसित भारत के निर्माण हेतु साझा संकल्प की अभिव्यक्ति” बताया और सभी से एनईपी के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए पूर्ण समर्पण का आह्वान किया।

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