नौकुचियाताल में धार्मिक, सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण हेतु समिति के सतत प्रयास

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भीमताल : क्षेत्र की ऐतिहासिक और पौराणिक धरोहरों को संजोए रखने के उद्देश्य से गठित संस्कृति धरोहर संरक्षण समिति, नौकुचियाताल द्वारा लगातार बहुमुखी प्रयास किए जा रहे हैं। समिति ने क्षेत्र के प्रमुख जलस्रोत कन्यूर को पुनर्जीवित कर समाज के सामने एक अनुकरणीय उदाहरण प्रस्तुत किया है। इसके साथ ही नौकुचियाताल सरोवर तट पर स्थित श्री हरि की पौड़ी मंदिर का जीर्णोद्धार किया गया और मां गंगा की मूर्ति की स्थापना समाजसेवी श्रीमती मोना बेदी के सहयोग से की गई। यह स्थान भगवान विष्णु के प्रथम अवतार सनकादि ऋषियों की तपोभूमि मानी जाती है, जिससे इसकी पौराणिक महत्ता और भी बढ़ जाती है। धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा देने और आध्यात्मिक वातावरण निर्मित करने के उद्देश्य से समिति द्वारा विगत दो वर्षों से नियमित रूप से शाम की गंगा आरती आयोजित की जा रही है, जिसमें देशभर से आए श्रद्धालु एवं पर्यटक सम्मिलित होते हैं। यहां हरिद्वार की भांति यज्ञोपवीत, हवन, तर्पण, स्नान आदि धार्मिक अनुष्ठान भी संपन्न कराए जाते हैं।
समिति के अध्यक्ष प्रमोद कर्नाटक, उपाध्यक्ष अनिल चनौतिया, सचिव डॉ. विवेकानंद पाठक, कोषाध्यक्ष किरण कुमार पांडेय सहित मनोज कर्नाटक, राजा पांडे, नवीन कर्नाटक, नरेश नौगाई, तनुज कर्नाटक, कर्नल रणबीर यादव, मोना बेदी, कार्तिक कर्नाटक, कुमुद पांडे, बिशन पोखरिया और मुकेश बहुगुणा ने संयुक्त रूप से बताया कि समिति सामुदायिक सहयोग के माध्यम से क्षेत्र की समस्त धार्मिक, पौराणिक, सामाजिक महत्व की धरोहरों के संरक्षण, संवर्धन व प्रचार-प्रसार हेतु सतत रूप से संलग्न है।
समिति प्रत्येक आयोजन में साफ-सफाई, पूजन-विसर्जन, जल प्रबंधन और श्रद्धालुओं की सुविधाओं का विशेष ध्यान रखती है, जिससे क्षेत्र को धार्मिक पर्यटन के मानचित्र में विशिष्ट स्थान दिलाया जा सके।




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