भीमताल झील की बदहाल स्थिति पर उठी चिंता, 27 वर्षों से सफाई का इंतजार

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भीमताल : कभी नैनीताल जनपद की जीवनदायिनी रही भीमताल झील आज प्रशासनिक उदासीनता और लगातार बढ़ते प्रदूषण के चलते बदहाली की कगार पर है। झील के मल्लीताल छोर पर उभरते डेल्टा और कम होता जलस्तर इस ऐतिहासिक जलस्रोत के अस्तित्व पर संकट का संकेत दे रहे हैं।
ज्ञात हो कि भीमताल झील की अंतिम बार सफाई वर्ष 1998 में हुई थी और तब से अब तक झील सफाई के इंतजार में है। झील में गिरने वाले ‘ड्रेन ए’ और ‘ड्रेन बी’ जैसे प्रमुख नाले भारी मात्रा में गाद, मिट्टी, सीवर और कचरा झील में जमा कर रहे हैं, जिससे न केवल झील की गहराई घट रही है बल्कि पानी की गुणवत्ता भी दिनोदिन खराब होती जा रही है। समाजसेवी व झील प्रेमी पूरन चंद्र बृजवासी ने झील की दयनीय स्थिति पर चिंता जताते हुए कहा कि झील अब मैदान में तब्दील होने लगी है। उन्होंने प्रशासन से तत्काल विशेष सफाई अभियान, नालों की सफाई, और गाद-मिट्टी की निकासी हेतु कार्य योजना और बजट स्वीकृति की मांग की है। उन्होंने बताया कि 1985 में भीमताल झील की औसतन गहराई 22 मीटर थी जो अब घटकर सिर्फ 17 मीटर रह गई है। वहीं वर्ष 2006 की रिपोर्ट में झील का पानी पीने योग्य नहीं पाया गया था। बृजवासी ने कहा कि मानसून से पूर्व नालों की जड़ से सफाई न होने की स्थिति में झील में भारी मात्रा में गंदगी समा सकती है, जिससे जलस्रोत प्रदूषण और दुर्गंध का केंद्र बन जाएगा।
पूरन चंद्र बृजवासी अब तक इस गंभीर समस्या को लेकर मुख्य विकास अधिकारी, जिलाधिकारी, कुमाऊं आयुक्त, शासन सचिव, विधायक, सांसद, मुख्यमंत्री एवं प्रधानमंत्री तक कई ज्ञापन भेज चुके हैं, लेकिन झील आज भी समाधान और सफाई की राह देख रही है। उन्होंने पुनः जिलाधिकारी वंदना सिंह से मांग की है कि भीमताल झील की संपूर्ण सफाई, ड्रेनों की मरम्मत व गाद निकासी, तथा झील संरक्षण हेतु स्थायी योजना बनाकर आवश्यक बजट स्वीकृति कराई जाए, ताकि आने वाली पीढ़ियों के लिए यह झील संरक्षित रह सके।




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