भीमताल : नैनीताल, जिला जो अपनी खूबसूरती और शांति के लिए जाना जाता है, 14 जुलाई को लोकतंत्र को शर्मसार करने वाली घटना का गवाह बना। पंचायत जिला अध्यक्ष चुनाव के दिन पाँच नवनिर्वाचित जिला पंचायत सदस्यों का बंदूक और तलवार की नोक पर अपहरण कर लेना, प्रशासन का मूकदर्शक बने रहना, और सत्ता के संरक्षण में यह कुकृत्य होना – देवभूमि उत्तराखंड को कलंकित करने वाला है।
माननीय उच्च न्यायालय ने जहाँ चुनाव परिणाम पर रोक लगाई है, वहीं सत्ताधारी लोग खुलेआम विजय का जश्न मना रहे हैं। यह भारतीय संविधान और लोकतांत्रिक मूल्यों का अपमान है।
दुःख की बात यह है कि अपहृत पाँच सदस्यों में से चार भीमताल विधानसभा के हैं, लेकिन उनके अपने विधायक ने अब तक एक शब्द नहीं बोला, न परिजनों से मिले, न चिंता जताई। इसके विपरीत वे व्यक्तिगत आरोप-प्रत्यारोप में उलझकर क्षेत्र की भावनाओं से खिलवाड़ कर रहे हैं। जनता आज सवाल पूछ रही है – आखिर भीमताल विधानसभा के ही सदस्य क्यों निशाने पर आए? क्या इसमें क्षेत्रीय नेताओं की भी भूमिका है? उन्होंने कहा कि सदस्यों के आपसी लेन-देन या बातचीत पर मैं कुछ नहीं कहूँगा, यह जिम्मेदारी उन्हीं की है कि वे जनता के सामने सच रखें। लेकिन सत्ता के संरक्षण में हुआ यह अपराध लोकतंत्र पर हमला है, और इसकी मैं कड़ी निंदा करता हूँ।सत्ता का सुख भोगने वालों से पूछना चाहता हूँ – जब नैनीताल जनपद कलंकित हो रहा है तो आप मौन क्यों हैं? क्या ऐसे कृत्यों का समर्थन कर रहे हैं? यह कदापि क्षमा योग्य नहीं है। उन्होंने कहा कि पूरे प्रदेश की जागरूक जनता का आभार व्यक्त करता हूँ, जो इस कुकृत्य के खिलाफ आवाज़ बुलंद कर रही है। यही जागरूकता हमारे लोकतंत्र और देवभूमि उत्तराखंड की अस्मिता को सुरक्षित रखेगी।

+ There are no comments
Add yours