हर्बल रंगों से आत्मनिर्भरता की नई पहचान, बसंती राणा बनीं महिला सशक्तिकरण की मिसाल

Estimated read time 1 min read





वैष्णवी स्वयं सहायता समूह ने होली पर बढ़ाई प्राकृतिक रंगों की तैयारी

भीमताल। होली पर्व को लेकर जहां बाजार रंगों से सजने लगे हैं, वहीं वैष्णवी स्वयं सहायता समूह की महिलाएं प्राकृतिक हर्बल रंगों के निर्माण में जुटी हैं। समूह की संचालिका बसंती राणा के नेतृत्व में तैयार किए जा रहे ये रंग आत्मनिर्भरता और महिला सशक्तिकरण की नई कहानी लिख रहे हैं।
फूलों, पालक, गाजर और चुकंदर से बनाए जा रहे प्राकृतिक रंग पर्यावरण के अनुकूल होने के साथ-साथ त्वचा के लिए भी सुरक्षित और रासायनिक मुक्त हैं। यही वजह है कि इन हर्बल रंगों की मांग स्थानीय बाजारों के अलावा ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर भी तेजी से बढ़ रही है।
बसंती राणा के नेतृत्व में वैष्णवी स्वयं सहायता समूह ने सीजनल उत्पादों को अपनी विशेषता बनाया है। रक्षा बंधन पर राखी निर्माण, करवाचौथ पर ऐपण डिजाइन थालियां, दीपावली पर फूल मालाएं और होली पर प्राकृतिक रंग तैयार किए जाते हैं। इसके अतिरिक्त समूह धूप-अगरबत्ती, मसाले, अचार सहित कई स्वदेशी व हस्तनिर्मित उत्पाद भी तैयार करता है।
आर्थिक रूप से भी समूह ने उल्लेखनीय सफलता हासिल की है। वर्ष में आयोजित खेल महाकुंभ के दौरान कैंटीन संचालन से सभी खर्चों के बाद लगभग आठ लाख रुपये की आय अर्जित की जाती है। वहीं वर्षभर विभिन्न उत्पादों की बिक्री से करीब चार लाख रुपये की अतिरिक्त आमदनी होती है।
महिला आत्मनिर्भरता को प्रोत्साहन देने के उद्देश्य से सरकार द्वारा समूह को 15 लाख रुपये का ऋण उपलब्ध कराया गया, जिससे उत्पादन क्षमता में वृद्धि और कार्यों का विस्तार संभव हुआ।
बसंती राणा और उनकी टीम की यह सफलता न केवल क्षेत्र की अन्य महिलाओं के लिए प्रेरणा बनी है, बल्कि यह भी सिद्ध करती है कि आत्मनिर्भर भारत की मजबूत नींव गांवों और स्वयं सहायता समूहों से ही तैयार होती है।




You May Also Like

+ There are no comments

Add yours