भीमताल । इथियोपिया के हेली गुब्बी (Hayli Gubbi) ज्वालामुखी की राख ने भारत के कई शहरों तक पहुंचकर असर दिखाना शुरू कर दिया है। लंबे समय से शांत यह ज्वालामुखी रविवार, 23 नवंबर को फटा, जिसके बाद राख और सल्फर डाइऑक्साइड का घना गुबार ऊपरी वायुमंडल में फैल गया। मौसम विभाग के अनुसार, सोमवार देर रात करीब 11 बजे यह राख दिल्ली-NCR के आसमान में भी दर्ज की गई।
भारतीय मौसम विभाग इस पूरे घटनाक्रम पर बारीकी से नजर रख रहा है। विभाग के विशेषज्ञों के मुताबिक, ज्वालामुखी के 10 हजार साल बाद पहली बार फटने से उठी राख ऊंचे स्तर पर अधिक सघन है, जिस कारण आम लोगों के दैनिक जीवन और सांस संबंधी स्वास्थ्य पर इसका सीधा प्रभाव फिलहाल सीमित माना जा रहा है। हालांकि संवेदनशील, अस्थमा या एलर्जी से पीड़ित लोगों को अनावश्यक रूप से खुले में अधिक समय न बिताने और जरूरत पड़ने पर मास्क आदि का उपयोग करने की सलाह दी गई है।
इधर, हवाई यातायात पर संभावित प्रभाव को देखते हुए एयर इंडिया भी सतर्क मोड में है। एयर इंडिया की ओर से जारी बयान में कहा गया है कि इथियोपिया क्षेत्र के कुछ हिस्सों में ज्वालामुखीय राख के बादलों को लेकर लगातार मॉनिटरिंग की जा रही है। एयरलाइन ने स्पष्ट किया कि फिलहाल उसके नियमित ऑपरेशनों पर कोई बड़ा असर नहीं पड़ा है, लेकिन सुरक्षा मानकों के तहत सभी एहतियाती कदम अपनाए जा रहे हैं।
एयर इंडिया ने बताया कि ज्वालामुखीय गुबार की वजह से स्थिति का आकलन करते हुए पूर्व में उसकी 11 उड़ानें रद्द की गई थीं। एयरलाइन प्रबंधन के अनुसार, यात्रियों, क्रू और एयरक्राफ्ट की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है, इसी को ध्यान में रखते हुए ऑपरेटिंग क्रू के साथ लगातार समन्वय बनाया जा रहा है।
एयरलाइन ने यह भी जानकारी दी कि पूरे नेटवर्क में तैनात ग्राउंड टीमें यात्रियों को उनकी फ्लाइट की अद्यतन स्थिति से अवगत करा रही हैं और जरूरतमंद यात्रियों को हरसंभव सहयोग उपलब्ध कराया जा रहा है। एयर इंडिया ने यात्रियों से अपील की है कि वे यात्रा से पहले अपनी उड़ान की स्थिति की जानकारी आधिकारिक स्रोतों से अवश्य प्राप्त कर लें।
विशेषज्ञों का मानना है कि राख का गुबार अधिक ऊंचाई पर होने के कारण सतह पर रहने वाले लोगों की दिनचर्या पर इसका प्रत्यक्ष असर सीमित है, लेकिन वायु गुणवत्ता और हवाई मार्गों पर इसके प्रभाव को देखते हुए संबंधित एजेंसियां स्थिति पर चौबीसों घंटे निगरानी बनाए हुए हैं।


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