नौकुचियाताल में उत्तरायणी पर्व पर हुए यज्ञोपवीत संस्कार, सदियों पुरानी परंपरा का निर्वहन

भीमताल। कुमाऊँ अंचल के प्रमुख धार्मिक एवं सांस्कृतिक पर्व उत्तरायणी के पावन अवसर पर नौकुचियाताल क्षेत्र में हर की पैड़ी में यज्ञोपवीत (जनेऊ) संस्कार विधि-विधान से संपन्न हुए। वैदिक मंत्रोच्चारण, हवन और पूजा-अर्चना के बीच दर्जनों बटुकों का यज्ञोपवीत संस्कार कराया गया, जिससे पूरे क्षेत्र में भक्तिमय वातावरण बना रहा।

मान्यता है कि उत्तरायणी के दिन सूर्य देव उत्तरायण होते हैं, जिसे अत्यंत शुभ और पुण्यकाल माना जाता है। इसी कारण इस दिन यज्ञ, हवन, दान-पुण्य और यज्ञोपवीत जैसे संस्कारों का विशेष महत्व है। नौकुचियाताल के हर की पैड़ी में यह परंपरा पीढ़ियों से चली आ रही है, जिसका स्थानीय लोग आज भी पूरे श्रद्धा भाव से निर्वहन करते आ रहे हैं।

उत्तरायणी पर्व पर परिवारों ने अपने बच्चों का बटुक संस्कार कराकर उन्हें वैदिक जीवन पथ पर अग्रसर करने का संकल्प लिया। पुजारी प्रमोद कर्नाटक और केदार दत्त पाठक ने यज्ञोपवीत संस्कार के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि यह संस्कार बालक के जीवन में विद्या अर्जन, अनुशासन और संस्कारों की शुरुआत का प्रतीक है।

इस अवसर पर मंदिरों में विशेष पूजा-अर्चना, हवन और दान-पुण्य का आयोजन किया गया। साथ ही उत्तरायणी पर्व के दौरान लोकसंस्कृति की झलक भी देखने को मिली। अनिल चनौतिया ने बताया कि उत्तरायणी केवल एक पर्व नहीं, बल्कि धर्म, प्रकृति और सामाजिक परंपराओं का संगम है। उत्तरायणी के अवसर पर स्थानीय युवाओं द्वारा माघ माह के पावन अवसर पर खिचड़ी भोग का भी आयोजन किया गया। हर की पैड़ी में पहुंचे श्रद्धालुओं ने प्रसाद के रूप में खिचड़ी का भोग ग्रहण किया। इस दौरान, महेश जोशी, जितेंद्र चनौतिया, त्रिलोक बहुगुणा, मुकेश साह, कार्तिक कर्नाटक, कुंदन महरा, लोकेश पोखरिया, आयुष दुमका, हर्षित दुमका, देवेंद्र चनौतिया, तनुज कर्नाटक, सुलभ जोशी, कुंदन बिष्ट, राजेश पलड़िया, कमल पलड़िया, ऋतिक पलड़िया, मेहुल नेगी, हिमांशु मेहता, राहुल मेहता, हर्षित मेहता, हेमू पलड़िया, सुनील पलड़िया, कपिल पलड़िया सहित अनेक युवा मौजूद रहे।

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