उत्तराखंड सरकार में कैबिनेट मंत्री प्रेमचंद अग्रवाल ने बजट सत्र के दौरान क्षेत्रवाद पर दिए अपने विवादित बयान के बाद रविवार को मंत्री पद से इस्तीफा दे दिया। इस्तीफे से पहले अग्रवाल अपनी पत्नी के साथ रामपुर तिराहा स्थित शहीद स्मारक पहुंचे और राज्य आंदोलनकारी शहीदों को श्रद्धांजलि दी। इसके बाद उन्होंने यमुना कॉलोनी स्थित अपने सरकारी आवास पर प्रेसवार्ता कर इस्तीफे की घोषणा की और भावुक होकर फफक पड़े। उन्होंने कहा कि राज्य आंदोलन में उनके योगदान को नकारा जा रहा है और सदन में दिए उनके बयान को तोड़-मरोड़ कर पेश किया गया है, जिससे वह आहत हैं।
बयान को लेकर पिछले कई दिनों से भाजपा के भीतर भी उन्हें लेकर असहजता थी। पार्टी प्रदेश अध्यक्ष महेंद्र भट्ट ने उनसे स्पष्टीकरण भी मांगा था। हालांकि बीच में केंद्र ने उन्हें मंत्रियों के समूह (GOM) में सदस्य नामित कर संकेत दिया था कि उन्हें तत्काल हटाने का इरादा नहीं है। मगर लगातार बने दबाव और विवाद के चलते आखिरकार उन्होंने स्वयं ही मंत्री पद से इस्तीफा देने का निर्णय लिया। इस्तीफा देने के बाद अग्रवाल मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी से मिलने सीएम आवास पहुंचे और त्यागपत्र सौंपा। मुख्यमंत्री ने उनका इस्तीफा अग्रिम कार्रवाई के लिए राज्यपाल को भेज दिया है।
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कैबिनेट में अब पांच सीटें खाली
धामी मंत्रिमंडल में पहले से ही चार सीटें खाली थीं। कैबिनेट मंत्री चंदन रामदास के निधन और सरकार गठन के वक्त से तीन सीटें रिक्त चल रही थीं। अब अग्रवाल के इस्तीफे के बाद कैबिनेट में पांचवीं सीट भी खाली हो गई है। इसके चलते मंत्रिमंडल विस्तार और फेरबदल की अटकलें और तेज हो गई हैं। माना जा रहा है कि धामी सरकार जल्द ही दिल्ली जाकर केंद्रीय नेतृत्व से इस पर चर्चा कर सकते हैं।

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