हल्द्वानी: आयकर विभाग ने हल्द्वानी में व्यापारिक और औद्योगिक संगठनों के प्रतिनिधियों के साथ एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की। इस बैठक का उद्देश्य कर प्रणाली में पारदर्शिता बढ़ाना और डिजिटल निगरानी के माध्यम से कर अनुपालन को मजबूत करना था। बैठक में वित्तीय लेनदेन की रिपोर्टिंग (SFT), ई-वेरिफिकेशन स्कीम और ITR(U) से जुड़े अहम विषयों पर चर्चा की गई।
बैठक की अध्यक्षता आयकर निदेशक (आयकर एवं आपराधिक अन्वेषण) कानपुर राकेश कुमार गुप्ता ने की। उन्होंने करदाताओं को आयकर नियमों की जानकारी देने के साथ ही बताया कि अब डिजिटल माध्यम से वित्तीय लेनदेन की निगरानी को और प्रभावी बनाया जा रहा है। इससे कर चोरी की संभावनाओं को रोका जा सकेगा और करदाताओं के लिए प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी बनाया जाएगा।
कर चोरी रोकने को डिजिटल मॉनिटरिंग होगी प्रभावी
बैठक के दौरान अधिकारियों ने बताया कि आयकर विभाग अब डिजिटल साधनों की मदद से वित्तीय लेनदेन पर सख्त नजर रखेगा। विभाग के पास SFT (Specified Financial Transactions) के तहत बैंकों, वित्तीय संस्थानों और अन्य सेवा प्रदाताओं से लेनदेन की जानकारी मिलेगी, जिससे करदाताओं के आय-व्यय का सही आकलन किया जा सकेगा।
इसके अलावा, ई-वेरिफिकेशन स्कीम और ITR(U) सुविधा के महत्व पर भी चर्चा हुई। यह सुविधा उन करदाताओं के लिए मददगार होगी जो गलती से गलत आयकर विवरण भर देते हैं और बाद में उसे सुधारना चाहते हैं। अधिकारियों ने बताया कि ITR(U) के जरिए अब करदाता अपनी आय का सही विवरण दर्ज कर सकते हैं और जुर्माने से बच सकते हैं।
व्यापारिक समुदाय ने की सकारात्मक पहल की सराहना
बैठक में लगभग 250 व्यापारिक और औद्योगिक संगठनों के प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया। इसमें राज्य उद्योग व्यापार मंडल, सीए एसोसिएशन, होटल एसोसिएशन, ज्वेलर्स एसोसिएशन, कॉपरेटिव बैंक, SIIDCUL एसोसिएशन समेत कई संस्थाओं के प्रतिनिधि शामिल रहे। व्यापारियों ने आयकर विभाग की इस पहल की सराहना की और कर प्रणाली में सुधार लाने के लिए सुझाव भी दिए।
इस मौके पर आयकर विभाग ने भविष्य में कर अनुपालन को और प्रभावी बनाने के लिए नए दिशानिर्देश जारी करने की बात कही। अधिकारियों ने कहा कि डिजिटल मॉनिटरिंग और पारदर्शी कर व्यवस्था से सरकार के ‘विकसित भारत-2047’ विजन को मजबूत किया जाएगा।

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