पहाड़ के स्वाद से महिलाओं ने संवारी तकदीर, सालाना छह से सात लाख की आय

Estimated read time 1 min read





भीमताल। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में प्रदेश सरकार महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने के लिए लगातार प्रयास कर रही है। राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के तहत संचालित ‘हिलांश किचन’ महिलाओं के लिए स्वरोजगार और आय का मजबूत माध्यम बनकर उभर रहा है। नैनीताल कलेक्ट्रेट परिसर में गीतांजलि स्वयं सहायता समूह की महिलाएं हिलांश किचन का संचालन कर प्रतिवर्ष करीब छह से सात लाख रुपये की आय अर्जित कर रही हैं।

राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के अंतर्गत स्वयं सहायता समूहों को टेंडर प्रक्रिया के माध्यम से हिलांश किचन निश्शुल्क उपलब्ध कराया जाता है। इसका उद्देश्य महिलाओं को स्वरोजगार से जोड़कर उनकी आय बढ़ाना और उन्हें आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाना है।

कलेक्ट्रेट परिसर स्थित हिलांश किचन में भट्ट के डुबके, भट्ट की चुड़कानी, कढ़ी-चावल, राजमा, मंडुवे की रोटी, पकौड़ी समेत पहाड़ी पारंपरिक व्यंजन परोसे जा रहे हैं। स्थानीय स्वाद, गुणवत्ता और आत्मीय सेवा के कारण ये व्यंजन स्थानीय लोगों के साथ ही पर्यटकों के बीच भी लोकप्रिय हो रहे हैं।

समूह की महिलाओं का कहना है कि हिलांश किचन के माध्यम से उन्हें नियमित आय का जरिया मिला है। इससे उनके परिवारों की आर्थिक स्थिति मजबूत हुई है और वे आत्मनिर्भरता की ओर आगे बढ़ रही हैं। सरकार का लक्ष्य महिलाओं को केवल रोजगार उपलब्ध कराना नहीं, बल्कि उन्हें उद्यमी बनाकर ‘लखपति दीदी’ के रूप में स्थापित करना है।

हिलांश किचन जैसी पहल से जहां महिलाओं की आय में वृद्धि हो रही है, वहीं उत्तराखंड के पारंपरिक खानपान और स्थानीय उत्पादों को भी नई पहचान मिल रही है। गीतांजलि स्वयं सहायता समूह की सफलता सरकार की योजनाओं और महिलाओं की मेहनत के बेहतर समन्वय का उदाहरण बनकर सामने आई है।




You May Also Like

+ There are no comments

Add yours