आईसीएआर-आईवीआरआई मुक्तेश्वर में भारतीय पशु प्रतिरक्षा एवं जैवप्रौद्योगिकी सोसाइटी का 30वां वार्षिक अधिवेशन सम्पन्न

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वन हेल्थ शिक्षा, अनुसंधान और नीति के लिए भारत की बड़ी पहल — डॉ. प्रवीण मलिक

भीमताल । भारतीय पशु चिकित्सा अनुसंधान संस्थान (आईसीएआर-आईवीआरआई), मुक्तेश्वर में आयोजित भारतीय पशु प्रतिरक्षा एवं जैव प्रौद्योगिकी सोसाइटी (ISVIB) के 30वें वार्षिक अधिवेशन का शनिवार को सफलतापूर्वक समापन हुआ। इस अवसर पर विभिन्न सत्रों में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले वैज्ञानिकों को सम्मानित किया गया। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि डॉ. प्रवीण मलिक, सीईओ एग्री इन्नोवेट इंडिया एवं पशुपालन आयुक्त, भारत सरकार, ने कहा कि “वन हेल्थ कोई छोटा विषय नहीं, बल्कि इसमें फूड सिस्टम, कृषि, वन्यजीव और पर्यावरण जैसे सभी पहलू शामिल हैं।” उन्होंने कहा कि डेटा प्रबंधन को सुदृढ़ करना और केंद्र व राज्य सरकारों के समन्वय से कार्य करना अत्यंत आवश्यक है।
डॉ. मलिक ने आईवीआरआई को “पशु चिकित्सा का मक्का और मदीना” बताते हुए विद्यार्थियों से शोध एवं नवाचार में योगदान देने का आह्वान किया। आईवीआरआई के निदेशक डॉ. त्रिवेणी दत्त ने कहा कि वन हेल्थ कार्यक्रम शिक्षा और अनुसंधान के क्षेत्र में बहुविषयी एवं अंतरविषयी पहल है, जो न केवल संस्थान बल्कि राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी उपयोगी सिद्ध होगी। उन्होंने कहा कि “विज्ञान, प्रौद्योगिकी, नवाचार और कौशल किसी भी देश की प्रगति के आधार स्तंभ हैं”, और आईवीआरआई का उद्देश्य उद्योगों, विश्वविद्यालयों और अनुसंधान संस्थानों के सहयोग से भारत को वैश्विक अनुसंधान मानचित्र पर अग्रणी बनाना है। संस्थान वर्तमान में 23 औद्योगिक साझेदारों के साथ अनुसंधान एवं नवाचार के क्षेत्र में सक्रिय सहयोग कर रहा है। विशेष रूप से आईएल कंपनी द्वारा बेंगलुरु परिसर में बीएसएल-3 प्रयोगशाला के विकास में सहयोग दिया जा रहा है। वहीं, एमएसपी संस्था छात्रवृत्तियों के माध्यम से आईवीआरआई के विद्यार्थियों को प्रोत्साहन दे रही है। आईवीआरआई ने हाल ही में वन हेल्थ पर ओपन एंड डिस्टेंस लर्निंग डिप्लोमा कार्यक्रम प्रारंभ किया है तथा अगले सत्र से वन हेल्थ में मास्टर डिग्री शुरू करने की योजना है, जिसे शैक्षणिक परिषद की स्वीकृति मिल चुकी है। आईसीएआर के सहायक महानिदेशक (शिक्षा नीति एवं मानव संसाधन) डॉ. बिमलेश मान ने कहा कि वन हेल्थ केवल अनुसंधान या नीति तक सीमित नहीं, बल्कि इसे शिक्षा के पाठ्यक्रमों में शामिल किया जाना चाहिए। उन्होंने सुझाव दिया कि कृषि शिक्षा से जुड़े सभी संस्थान स्नातक स्तर से ही वन हेल्थ विषयों को शामिल करें, जिससे भावी वैज्ञानिक और पशु चिकित्सक इस अवधारणा को व्यवहारिक रूप में लागू कर सकें।
विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के दक्षिण-पूर्व एशिया क्षेत्रीय अधिकारी डॉ. ज्ञानेंद्र गोंगल ने कहा कि भारत नवाचार और विशेषज्ञता का अग्रणी देश है। उन्होंने जलवायु परिवर्तन को खाद्य सुरक्षा और मानव स्वास्थ्य के लिए सबसे बड़ी चुनौती बताते हुए दक्षिण एशियाई देशों के बीच क्षेत्रीय सहयोग की आवश्यकता पर बल दिया।
एफएमडी निदेशक, भुवनेश्वर, डॉ. आर.पी. सिंह ने मुक्तेश्वर परिसर में हो रहे सकारात्मक परिवर्तनों की सराहना की और कहा कि संस्थान की सुविधाओं का उपयोग अन्य संस्थानों और शोधकर्ताओं को भी करना चाहिए, जिससे अकादमिक गतिविधियों को और बल मिलेगा। उन्होंने मुक्तेश्वर परिसर को “पशु स्वास्थ्य, पशु उत्पादन और स्थानीय उद्यमिता का केंद्र” बताया। कार्यक्रम के समापन पर संयुक्त निदेशक (मुक्तेश्वर) डॉ. यशपाल मलिक ने सभी अतिथियों का आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि सम्मेलन में प्राप्त सुझावों और सिफारिशों को संबंधित मंत्रालयों को भेजा जाएगा, ताकि वन हेल्थ से जुड़ी चुनौतियों से प्रभावी ढंग से निपटा जा सके। इस अवसर पर कार्यक्रम समन्वयक डॉ. अमित कुमार, डॉ. करम चंद, सहित अनेक वैज्ञानिक, शोधार्थी और संस्थान के अधिकारी-कर्मचारी उपस्थित रहे।




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